रविवार, 15 अगस्त 2010

देश ने पुकारा है...........................|

                        देश ने पुकारा है...........................|

मेरे देश के सभी वाशियों को मेरी तरफ से स्वन्त्रतादिवस की ढेर सारी शुभ कामनाएं | अपने देश का आज जो हल है उसे देखकर मुझे  बहुत कष्ट होता है पर किसी ने कहा है की "अकेला चना भाडं नहीं फोड़ सकता" इसी लिये मै अपने सभी देशवासियों को अपना सन्देश पहचाना चाहती हूँ |आज स्वंत्रता दिवस के दिन जब मै अपने देश के वीर शहीदों को याद कर रही थी तो मेरे मन में देश की आज जो दुर्गति हो रही है वो कविता का रूप लेने लगी और मैंने उसे इस प्रकार पंक्तिबद्ध किया है|जो भी गलतिया हो कृपया माफ करे|

  देश के सपूतो सुनो ,देश ने पुकारा है,
                               सुन पुकार तुम उठो ,वक्त का इशारा है|
देश के..........................

जिस तरह से देश हित में,
                                    प्राण तज गये पल में,
उन्ही देश भक्तो ने तुमको फिर पुकारा है,
अब न रुको बढ़ चलो ,स्वार्थ न गवारा है,|
देश ....................

राजनीती की बिसात ,बिछ चुकी है कैसी आज,
                            दाव पर लगा माँ को ,हंस रहा नाकारा है,
बन के कृष्ण आवो तुम,लाज फिर बचाओ तुम,
                            कह रही है माँ जननी ,बस तेरा सहारा है,|
देश.................................

अपनी माँ का देख हाल,दुखित हुए वीर लाल ,
                                   मिट गये जो देश हित में ,कर रहे है वो मलाल,
भेजते हमें सन्देश ,उठ पुकारता है देश,
                                    आर्त स्वर में कह रहा ,देश ये हमारा है,|
देश........................................

बढ़ चलो समर भू में,गाओ सभी एक स्वर में ,
                                          देश की भलाई को,बढ़ चलो सभी रण में,
आज न रुकेंगे हम, कर लिया है मन में प्रण,
                                          वीर पथ पे चलना ही,कर्म अब हमारा है.
देश...........................................|

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