प्यारे दोस्तों आप हम सब जानते है की आज धरती माता से हरियाली दूर होती जा रही है और इस बात से सब परेशां भी है पर केवल परेशान होने से कुछ हासिल नहीं होने वाला. यही सोचते-२ मरे मन में कुछ पंक्तिया आई जो मैं सन्देश रूप में आप सब को सुनाना चाहती हूँ .यदि आप को पसंद आई तो मुघे बहुत ख़ुशी होगी ..............
माँ धरती कर रही पुकार
नहीं सुन रहा यह संसार
नहीं कर रहे इसका भान
मिट न जाये धरती की शान .
बंद करो अपनी जयकार ,
और ज़रा सुन लो इक बार .
माँ धरती कर रही पुकार I
अब न रही खुशहाली वैसी ,
कहाँ गयी हरियाली जो थी!
कटते वन व नदी सूखती ,
माँ धरती की ख़ुशी डूबती.
आब तो सोचो तुम इक बार ,
माँ धरती कर रही पुकार .
आओं सब मिल पौधे लगाये ,
धरती पर हरियाली लाये .
धरती की हर लें सब पीर,
मेघ सरश वार्षाएं नीर .
यही प्रार्थना है अब मेरी ,
उठ जाओ न करो देरी,
अब तो कदम बढाओ यार ,
माँ धरती कर रही पुकार.
अब तो सुन ले ये संसार
माँ धरती की करुण पुकार I
गुरुवार, 6 मई 2010
रविवार, 2 मई 2010
बाग़-बाग़ दिल हुआ हमारा
मेरे प्यारे ब्लॉगर भाई बहनों आप सब के comments मिले जिससे मुझे अत्यधिक ख़ुशी हुई आप सब के लिए मैंने कुछ लिखा शायद आप को पसंद आये .
आप सबो ने हमें शराहा
बाग़-बाग़ दिल हुआ हमारा.
नमन आप सब को मेरा है
कभी न छूटे साथ हमारा
हुई ख़ुशी है मुझ को इतनी
ज्यू सागर में लहरे उठती
मेरे प्यारे भाई बहनों
थामे रहना हाथ हमारा
बाग़-बाग़ दिल हुआ हमारा
आओं करे प्रणाम उन्हें हम,
जो थे देश के सच्चे हमदम
उन्ही के पद चिन्हों पर चल कर
देश को दे इक नया किनारा
वे भी हम पर नाज़ कर सके
कुछ ऐसा हो कम हमारा
बाग़-बाग़ दिल हुआ हमारा
धन्न्यवाद है आप सभी को
मिला आप का साथ है हम को
देश प्रेम की धार बहे यूँ
सागर में ज्यू नदी की धारा
चलो करे कुछ देश की खातिर
आएगा न वक्त दोबारा
आओं मिल कर बोले हम सब
एक साथ जैहिंद का नारा
बाग़-बाग़ दिल हुआ हमारा.
धन्न्यबाद
आप सबो ने हमें शराहा
बाग़-बाग़ दिल हुआ हमारा.
नमन आप सब को मेरा है
कभी न छूटे साथ हमारा
हुई ख़ुशी है मुझ को इतनी
ज्यू सागर में लहरे उठती
मेरे प्यारे भाई बहनों
थामे रहना हाथ हमारा
बाग़-बाग़ दिल हुआ हमारा
आओं करे प्रणाम उन्हें हम,
जो थे देश के सच्चे हमदम
उन्ही के पद चिन्हों पर चल कर
देश को दे इक नया किनारा
वे भी हम पर नाज़ कर सके
कुछ ऐसा हो कम हमारा
बाग़-बाग़ दिल हुआ हमारा
धन्न्यवाद है आप सभी को
मिला आप का साथ है हम को
देश प्रेम की धार बहे यूँ
सागर में ज्यू नदी की धारा
चलो करे कुछ देश की खातिर
आएगा न वक्त दोबारा
आओं मिल कर बोले हम सब
एक साथ जैहिंद का नारा
बाग़-बाग़ दिल हुआ हमारा.
धन्न्यबाद
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